टैक्स और सैलरी

पुरानी vs नई कर व्यवस्था: आपके लिए कौन सी बेहतर है?

TrueNumbers India टीम · अपडेट जून 2026 · 8 मिनट पढ़ने का समय

कर नियम बदलते रहते हैं — यहाँ दी गई जानकारी वर्तमान वित्त वर्ष के लिए है, लेकिन हमेशा incometax.gov.in पर वर्तमान नियम देखें या CA से सलाह लें। 2020 में नई कर व्यवस्था आई — सरल, कम दरें, लेकिन अधिकांश कटौतियां (deductions) नहीं। पुरानी व्यवस्था जटिल है लेकिन 80C, HRA, होम लोन ब्याज जैसी कटौतियां देती है। सवाल यह है — कौन सी बेहतर है?

दोनों व्यवस्थाओं में मुख्य अंतर

नई व्यवस्था में कम स्लैब दरें हैं लेकिन 80C, 80D, HRA, LTA, होम लोन ब्याज जैसी कटौतियां नहीं मिलतीं। केवल मानक कटौती (standard deduction) मिलती है। नई व्यवस्था उन लोगों के लिए डिज़ाइन की गई है जो कम निवेश करते हैं या जिनके पास कम कटौतियां हैं।

पुरानी व्यवस्था में ज़्यादा दरें हैं लेकिन यदि आप 80C (₹1.5 लाख), 80D (स्वास्थ्य बीमा), HRA, और होम लोन ब्याज (₹2 लाख) जैसी कटौतियों का पूरा फायदा उठाते हैं, तो करों में काफी बचत हो सकती है।

किसके लिए कौन सी व्यवस्था?

नई व्यवस्था आम तौर पर बेहतर होती है अगर: आपकी आय ₹7 लाख तक है (नई व्यवस्था में ₹7 लाख तक कोई टैक्स नहीं — rebate के कारण); आपके पास कम कटौतियां हैं (किराए पर नहीं रहते, होम लोन नहीं है, निवेश कम है); आप सरलता चाहते हैं।

पुरानी व्यवस्था आम तौर पर बेहतर होती है अगर: आपकी आय ₹10-12 लाख से ज़्यादा है; आप 80C में पूरे ₹1.5 लाख का निवेश करते हैं (PPF, ELSS, EPF, बच्चों की ट्यूशन फीस); आपको HRA मिलती है और आप किराए पर रहते हैं; आपका होम लोन है।

अपना खुद हिसाब लगाएं

दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करने का सबसे आसान तरीका है — हमारे Income Tax Calculator में अपनी आय और कटौतियां डालें। यह तुरंत दोनों व्यवस्थाओं में आपकी टैक्स देनदारी दिखाएगा और बताएगा कौन सी बेहतर है।

याद रहे: टैक्स की बचत अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ऐसी जगह निवेश न करें जो आपकी ज़रूरत और लक्ष्य के लिए सही न हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हर साल व्यवस्था बदल सकते हैं?

वेतनभोगी (salaried) कर्मचारी हर साल ITR भरते समय व्यवस्था चुन सकते हैं। व्यवसायी (business income वाले) एक बार नई व्यवस्था चुनने के बाद बदलने में सीमाएं हैं। नवीनतम नियम incometax.gov.in पर देखें।

नई व्यवस्था में ₹7 लाख तक टैक्स माफ कैसे होता है?

धारा 87A की rebate के कारण नई व्यवस्था में ₹7 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं बनता। ₹7 लाख से ज़्यादा आय पर सभी स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। नवीनतम सीमाएं incometax.gov.in पर देखें।

मानक कटौती (standard deduction) कितनी है?

वर्तमान मानक कटौती की राशि बजट में बदलती है — incometax.gov.in पर वर्तमान राशि देखें। यह दोनों व्यवस्थाओं में मिलती है।

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